छत्तीसगढ़
श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में किसानों और ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन, पुलिस ने किया लाठीचार्ज
Shantanu Roy
6 Dec 2025 11:03 PM IST

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Kawardha/Khairagarh. कवर्धा/खैरागढ़। खैरागढ़ जिले में शनिवार को श्री सीमेंट परियोजना के विरोध में ग्रामीणों और किसानों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने प्रस्तावित सण्डी चूना पत्थर खदान और सीमेंट प्लांट के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई और कुछ पुलिसकर्मी ग्रामीणों की भीड़ से भागते नजर आए। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने 200 से अधिक ट्रैक्टर–ट्रॉलियों के साथ सैकड़ों गांवों से छुईखदान की ओर कूच किया। पुलिस ने छुईखदान की सीमा पर किसानों की रैली को रोकने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीण पैदल ही आगे बढ़ते हुए एसडीएम कार्यालय तक पहुँच गए। वहां उन्होंने 11 दिसंबर को प्रस्तावित जनसुनवाई रद्द करने की मांग का ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों का विरोध इसलिए भी मजबूत है क्योंकि प्रस्तावित खदान क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 39 गांवों ने औपचारिक रूप से परियोजना के खिलाफ लिखित आपत्ति दर्ज कराई है। सण्डी, पंडारिया, विचारपुर और भरदागोड़ पंचायतों ने ग्रामसभा प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया कि वे किसी भी कीमत पर चूना पत्थर खदान को मंजूरी नहीं देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि खदान शुरू होने से जलस्रोत सूखने, खेती-किसानी प्रभावित होने, पशुपालन पर खतरा मंडराने और पर्यावरण को गंभीर नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने जनसुनवाई प्रक्रिया को भी अपारदर्शी बताया और कहा कि प्रभावित गांवों की वास्तविक राय को नज़रअंदाज किया गया। एसडीएम कार्यालय तक ज्ञापन सौंपने के बाद ग्रामीणों ने अचानक राजनांदगांव–कवर्धा मुख्य सड़क को भी जाम कर दिया, जिससे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों और महिलाओं की मौजूदगी के कारण हालात तनावपूर्ण हो गए।
पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक 11 दिसंबर की जनसुनवाई रद्द नहीं होती और श्री सीमेंट परियोजना से जुड़े निर्णय वापस नहीं लिए जाते। प्रशासन अलर्ट पर है। एसपी सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर भारी पुलिस बल के साथ स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन का प्रयास है कि हालात नियंत्रण में रहें और किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। यह आंदोलन केवल भूमि या पर्यावरण का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि स्थानीय लोगों के अस्तित्व, आजीविका और भविष्य की सुरक्षा का बड़ा संघर्ष बन गया है। हजारों किसानों का यह शक्ति प्रदर्शन यह स्पष्ट संकेत देता है कि जनता अपनी जमीन और जलस्रोतों पर किसी प्रकार का समझौता करने के लिए तैयार नहीं है। ग्रामीणों का आंदोलन समाज और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी है कि यदि स्थानीय लोगों की राय को गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह संघर्ष और अधिक तीव्र हो सकता है। इसके साथ ही आंदोलन ने यह संदेश भी दिया कि गांवों के लोग अपने हक, संसाधन और प्राकृतिक संपदा की रक्षा के लिए हमेशा सक्रिय रहेंगे।
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